कंटा विराजो देवी कंटा वीराजो ये कोई गाता तो गांव रे धोल्या जाट की हेई जे
प्रथम सिमरू गणपत ने प्रथम स्वरूप कोई दूजा तो सिमरु देवी शारदा हेई जे
खरनाल्य जन्मे तेजाजी खरनल्य जन्मे कोई माह को तो महीना रे 14 चांदनी
जेठ आशाड़ो लाग्यो जेठ साडो कोई लगातोड़ो लाग्यो सावन भादो
धरती को मंडल मोवो धरती को मंडल मेवो कोई मेवा की मंडन अंबर बिजली
अर्थावणी
सावन भादवा का महीना था और तेजाजी महाराज सुख भर की नींद में सो रहे थे तब तेजाजी महाराज की माता राम कंवरी आती है और तेजाजी महाराज को जगाती है तेजाजी महाराज से अपनी माता बोलते है कि है पुत्र आप खेत में जाओ आपके साथी है वह बाजरी बिज रहे हैं
तब वीर कंवर तेजाजी महाराज मां से माना करते हैं कि माता हम राजन खजान हैं हम खेत में नहीं जाएंगे खेत में आप हाली को भेजो तब मा बोलती है हालिया का मूंग जवारो कोई तेजल का बिजोड़ा मोती निबजे
तब तेजाजी महाराज अपनी मां से पूछते हैं कि मेरी राशि पुरानी कहां पर है और बैल कहां पर है तब मां बताती है कि खूंटियां टंकी रास पिरानी कंवर तेजा रे कोई गोरिया में बंदिया बलिया सोरटा
इतनी बातें होने के बाद तेजाजी महाराज अपनी मां से पूछते हैं कि मेरा खाना कौन लेकर आएगा बैलों के लिए चार कौन लेकर आएगा मां बोलती है कि भावाज रत्नावती है जो भाता लेकर आएगी और बहन जो आपकी छोटी वाली है बुगरी वह आपके बैलों के लिए चार ले आएगी तेजाजी महाराज बेलो को लेकर खेत में जाते हैं सावल माता को मानते हैं और बाजरी बिजना स्टार्ट कर देते हैं
.jpeg)
